नए इनकम टैक्स कानून में HRA, PAN और Form 16 से जुड़े बड़े बदलाव सामने आए

भारत में 1 अप्रैल से Income-tax Act, 2025 लागू होने जा रहा है, जो लगभग 60 साल पुराने Income-tax Act, 1961 की जगह लेगा। सरकार का उद्देश्य केवल टैक्स दरों में बदलाव करना नहीं है, बल्कि पूरे टैक्स सिस्टम को आधुनिक, डिजिटल और पारदर्शी बनाना है। हालांकि आम करदाताओं के लिए राहत की बात यह है कि टैक्स स्लैब और टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। लेकिन रिपोर्टिंग, डिस्क्लोजर और फाइलिंग की प्रक्रिया अब पहले की तुलना में अधिक सख्त और सिस्टम-आधारित होगी।
मील बेनिफिट्स और HRA नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव
नए नियमों के तहत वेतनभोगी कर्मचारियों को मिलने वाले मील बेनिफिट्स में बड़ा बदलाव किया गया है। अब कंपनी द्वारा दिए जाने वाले मील कार्ड या वाउचर जैसे Sodexo और Pluxee पर टैक्स छूट की सीमा 50 रुपये प्रति मील से बढ़ाकर 200 रुपये प्रति मील कर दी गई है। इससे कर्मचारियों को सालाना करीब 1 लाख रुपये तक का टैक्स-फ्री लाभ मिल सकता है। वहीं, HRA (हाउस रेंट अलाउंस) के नियमों में भी संशोधन किया गया है। अब 50% छूट वाले शहरों की सूची में बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी शामिल किया गया है, लेकिन HRA क्लेम के लिए मकान मालिक की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे फर्जी दावों पर रोक लगाई जा सके।

Form 16 की जगह अब नया Form 130 और PAN नियमों में सख्ती
नए कानून में एक बड़ा बदलाव Form 16 से जुड़ा है। अब कंपनियां कर्मचारियों को Form 16 जारी नहीं करेंगी, बल्कि इसकी जगह नया Form 130 दिया जाएगा। इससे पूरी ITR फाइलिंग प्रक्रिया सिस्टम आधारित हो जाएगी। हालांकि, इस बदलाव के चलते TDS में किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर रिफंड मिलने में देरी हो सकती है। इसके अलावा PAN कार्ड से जुड़े नियमों को भी सख्त किया गया है। अब गाड़ी खरीदने-बेचने जैसे हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन में PAN देना अनिवार्य होगा। टैक्स रिजीम चुनने की प्रक्रिया को भी आसान बनाते हुए अब ITR फाइल करते समय ही विकल्प चुनने की सुविधा दी गई है।
डिजिटल और पारदर्शी टैक्स सिस्टम की ओर कदम
नया इनकम टैक्स कानून पूरी तरह से टैक्स सिस्टम को डिजिटल, पारदर्शी और फेसलेस बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य कम मानवीय हस्तक्षेप, तेज प्रोसेसिंग और जल्दी रिफंड सुनिश्चित करना है। ऐसे में करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपनी सैलरी स्ट्रक्चर, HRA डिटेल्स, PAN लिंकिंग और TDS रिकॉर्ड को नियमित रूप से जांचते रहें। इससे न केवल टैक्स फाइलिंग आसान होगी बल्कि भविष्य में किसी भी प्रकार की परेशानी से भी बचा जा सकेगा।