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कैसे लें पीएम विश्वकर्मा योजना का लाभ और अपने हुनर को व्यवसाय में बदलें

भारत सरकार समय-समय पर लोगों की आय बढ़ाने और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं लागू करती रही है। इन योजनाओं का लाभ समाज के विभिन्न वर्गों को मिलता है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने पीएम विश्वकर्मा योजना की शुरुआत की है। यह योजना विशेष रूप से उन कारीगरों और शिल्पकारों के लिए है जो अपने हाथों के हुनर से जीविका कमाते हैं और पारंपरिक कौशल में माहिर हैं।

पारंपरिक कारीगरों को सशक्त बनाने की पहल

पीएम विश्वकर्मा योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को सशक्त बनाना है। इसके तहत लाभार्थियों को उनके हुनर को व्यवसाय में बदलने के लिए आधुनिक प्रशिक्षण दिया जाता है। यह योजना केवल रोज़गार देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें अपने काम को उन्नत स्तर पर ले जाने के लिए सहायता प्रदान करती है। योजना के तहत प्रशिक्षण के साथ-साथ वित्तीय सहायता और ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है, जिससे कारीगर अपनी कला को व्यवसाय में बदल सकें।

कैसे लें पीएम विश्वकर्मा योजना का लाभ और अपने हुनर को व्यवसाय में बदलें

प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता के अवसर

पीएम विश्वकर्मा योजना 18 विभिन्न कौशलों को कवर करती है, जिनमें सुनार, लोहार, नाई, और अन्य पारंपरिक कला शामिल हैं। प्रशिक्षण के दौरान लाभार्थियों को ₹500 प्रति दिन का स्टाइपेंड भी दिया जाता है। प्रशिक्षण पूरा होने पर उन्हें विश्वकर्मा सर्टिफिकेट और आईडी कार्ड प्रदान किया जाता है। इसके साथ ही ₹15,000 का टूलकिट प्रोत्साहन और स्किल अपग्रेडेशन भी मिलता है। इस योजना का मकसद केवल कौशल प्रदान करना नहीं, बल्कि इसे व्यवसाय में बदलने के लिए समर्थन देना है।

कम ब्याज दर पर ऋण और आवेदन प्रक्रिया

यदि कोई कारीगर अपने व्यवसाय की शुरुआत करने में असमर्थ है, तो पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकता है। इस योजना के तहत अधिकतम ₹3 लाख का ऋण लिया जा सकता है। प्रारंभिक व्यवसाय के लिए ₹1 लाख और व्यवसाय विस्तार के लिए दूसरा चरण ₹2 लाख तक का ऋण उपलब्ध है। विशेष बात यह है कि यह ऋण मात्र 5% ब्याज दर पर मिलता है। कारीगर इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं या नजदीकी सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) जाकर ऑफलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं।

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