सोना बनाएगा नया इतिहास, 2026 में कीमतें 1.75 लाख तक पहुंचने का बड़ा अनुमान

पिछले साल की तरह इस साल भी सोने की कीमतों में मजबूती देखने को मिल रही है। हालांकि नए साल के शुरुआती दस दिनों में यह तेजी एक सीमित दायरे में रही है। 31 दिसंबर 2025 को दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोना 1 लाख 37 हजार 700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। नए साल के पहले ही दिन यानी 1 जनवरी 2026 को इसमें तेजी आई और भाव 1 लाख 38 हजार 340 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इसके बाद 9 जनवरी शुक्रवार को सोने की कीमतों में 1200 रुपये की बड़ी उछाल दर्ज की गई और यह 1 लाख 41 हजार 700 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए उच्च स्तर पर बंद हुआ। इस तरह पिछले साल के आखिरी कारोबारी दिन की तुलना में अब तक सोने की कीमतों में करीब 4000 रुपये यानी लगभग 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है। इससे साफ है कि निवेशकों का भरोसा अब भी सोने पर बना हुआ है।
2026 में कितनी ऊंचाई तक जा सकता है सोना
सोने की आगे की चाल को लेकर बाजार में कई तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं। केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर और जाने माने मार्केट एक्सपर्ट अजय केडिया का मानना है कि आने वाले महीनों में भी सोने की मांग बनी रहेगी। उन्होंने बताया कि भू राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर देख रहे हैं। अजय केडिया के मुताबिक इस साल सोने की तेजी पिछले साल जैसी तेज नहीं होगी लेकिन फिर भी इसमें अच्छी बढ़त की पूरी संभावना है। उनका अनुमान है कि साल 2026 में सोने के भाव 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो सोना 1 लाख 65 हजार रुपये से लेकर 1 लाख 75 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। यानी मौजूदा स्तर से सोने की कीमतों में करीब 35 हजार रुपये तक की और बढ़ोतरी संभव है।
वैश्विक तनाव से बढ़ रही सुरक्षित निवेश की मांग
सोने की कीमतों को मजबूती देने में अंतरराष्ट्रीय हालात की बड़ी भूमिका है। हाल ही में वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई के बाद वैश्विक तनाव और गहरा गया है। अब निवेशकों की नजरें ईरान को लेकर अमेरिका के रुख पर टिकी हुई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को लेकर कई बार सख्त चेतावनियां जारी कर चुके हैं। ऐसे हालात में निवेशक जोखिम भरे निवेश से दूरी बनाकर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। सोना हमेशा से ऐसे समय में निवेशकों की पहली पसंद रहा है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं का सीधा असर सोने की मांग और कीमतों पर पड़ रहा है।
निवेशकों की रणनीति और आगे की राह
इसके साथ ही निवेशक अमेरिका में टैरिफ से जुड़े फैसलों और उन पर सुप्रीम कोर्ट के रुख को लेकर भी सतर्क हैं। बाजार में संभावित उतार चढ़ाव से बचने के लिए निवेशक अपनी रणनीति को नए सिरे से तैयार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर तनाव और अनिश्चितता बनी रहेगी तब तक सोने की कीमतों को समर्थन मिलता रहेगा। हालांकि निवेशकों को यह भी सलाह दी जा रही है कि वे अचानक आई तेजी के पीछे आंख बंद करके न भागें। लंबी अवधि के नजरिए से सोच समझकर निवेश करना ज्यादा बेहतर रहेगा। कुल मिलाकर 2026 में सोना एक बार फिर निवेशकों को आकर्षक रिटर्न देने की क्षमता रखता है और यही वजह है कि इसकी चमक फिलहाल फीकी पड़ती नजर नहीं आ रही है।
