आर्थिक विस्तार से बीमा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव, प्रीमियम आय में जबरदस्त उछाल

विश्वप्रसिद्ध रेटिंग एजेंसी मूडीज ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है। एजेंसी का मानना है कि इस मजबूत आर्थिक विस्तार से देश की औसत घरेलू आय में वृद्धि होगी, जिसका सकारात्मक असर बीमा क्षेत्र की मांग पर पड़ेगा। आर्थिक गतिविधियों में तेजी और बेहतर आय स्तर के चलते आम जनता में बीमा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, जिससे बीमा उद्योग को दीर्घकालिक रूप से लाभ होगा। यह वृद्धि न केवल बीमा उत्पादों की मांग बढ़ाएगी, बल्कि बीमा कंपनियों की लाभप्रदता में भी सुधार का संकेत है।
बीमा क्षेत्र में प्रीमियम आय की बढ़ोतरी
मूडीज ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि भारत के बीमा क्षेत्र को प्रीमियम आय में निरंतर वृद्धि का लाभ मिलेगा। इस बढ़ोतरी के पीछे मजबूत आर्थिक विस्तार, डिजिटलीकरण में तेजी, कर प्रणाली में सुधार और सरकारी स्वामित्व वाली बीमा कंपनियों में प्रस्तावित सुधार जैसे कई कारक हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले आठ महीनों (अप्रैल से नवंबर) में भारत की कुल बीमा प्रीमियम आय में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो 10.9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। स्वास्थ्य बीमा में 14 प्रतिशत की वृद्धि और जीवन बीमा में 20 प्रतिशत उछाल दर्ज किया गया है, जो पिछले साल की तुलना में कहीं अधिक तेजी दर्शाता है।
डिजिटलीकरण और सरकारी सुधारों का प्रभाव
मूडीज के अनुसार, बीमा क्षेत्र में प्रीमियम आय की यह वृद्धि भारतीय उपभोक्ताओं में जोखिम के प्रति जागरूकता और आर्थिक डिजिटलीकरण के तेजी से बढ़ने को दर्शाती है। डिजिटलीकरण की वजह से बीमा उत्पादों की बिक्री और वितरण में सुविधा आई है, जिससे आम जनता के लिए बीमा अधिक सुलभ हो गया है। यह विकास बीमा नियामक प्राधिकरण के “2047 तक सभी के लिए बीमा” के लक्ष्य के अनुरूप है। साथ ही, सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों की लाभप्रदता सुधारने पर विशेष ध्यान दे रही है। सरकार ने एलआईसी में अल्पांश हिस्सेदारी बेचने और सरकारी बीमा कंपनियों को पूंजी उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनकी अंडरराइटिंग क्षमता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
विदेशी निवेश और भविष्य की संभावनाएं
मूडीज ने यह भी बताया कि भारतीय बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा को 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने की पहल से इस क्षेत्र को वित्तीय मजबूती मिलेगी। इससे पूंजी की उपलब्धता बढ़ेगी और वैश्विक विशेषज्ञता, बेहतर प्रबंधन प्रथाओं के कारण भारतीय बीमा उद्योग और सशक्त होगा। साथ ही, सरकारी बीमा कंपनियों के विलय या निजीकरण जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उद्योग का विकास होगा। कुल मिलाकर, मजबूत आर्थिक वृद्धि, डिजिटलीकरण, सरकारी सुधार और विदेशी निवेश के कारण भारत का बीमा क्षेत्र आने वाले वर्षों में तेजी से उभरने की पूरी संभावना रखता है।
