ग्लोबल मुश्किलों के बावजूद भारतीय इकॉनमी बनी मजबूत, घरेलू डिमांड बनी वृद्धि का आधार

देश के सबसे बड़े लेंडर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की इकॉनमी में मजबूती बरकरार रहने की उम्मीद है। मौजूदा फाइनेंशियल ईयर FY26 की तीसरी तिमाही में GDP ग्रोथ लगभग 8.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल मुश्किलों के बावजूद भारतीय इकॉनमी मजबूत बनी हुई है, और इसे घरेलू डिमांड और सभी सेक्टर में स्थिर एक्टिविटी का समर्थन मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि Q3FY26 में रियल GDP ग्रोथ इस स्तर के करीब रहने से देश की आर्थिक वृद्धि के भरोसे को बल मिलेगा।
मजबूत जीडीपी के कारण
SBI की रिपोर्ट के अनुसार, हाई-फ्रीक्वेंसी इकोनॉमिक इंडिकेटर FY26 की तीसरी तिमाही में मजबूत इकॉनमिक एक्टिविटी का संकेत दे रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कंजम्पशन मजबूत है, जिसे खेती और नॉन-खेती दोनों तरह की एक्टिविटी से पॉजिटिव सिग्नल मिल रहे हैं। शहरी कंजम्पशन में भी सुधार हुआ है, जिसका श्रेय फाइनेंशियल स्टिमुलस और पिछले त्योहारी सीजन में बढ़े खर्च को दिया गया है। पहले एडवांस अनुमानों के मुताबिक FY26 में भारत की GDP 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है, जिसमें ग्रोथ मुख्य रूप से घरेलू डिमांड पर निर्भर होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल अनिश्चितताओं के बावजूद घरेलू खपत इकोनॉमिक ग्रोथ को सपोर्ट करने में अहम भूमिका निभा रही है।

नया बेस ईयर और आगामी GDP डेटा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि FY26 के लिए GDP का दूसरा एडवांस अनुमान 27 फरवरी, 2026 को जारी किया जाएगा। इस बार डेटा और बेस ईयर में बदलाव के कारण पहली और दूसरी तिमाही के GDP आंकड़ों में बदलाव की संभावना है। भारत ने अपने GDP बेस ईयर को 2011-12 से 2022-23 में अपडेट किया है। नई सीरीज भारतीय इकॉनमी के वर्तमान स्ट्रक्चर को बेहतर तरीके से दर्शाएगी, जिसमें डिजिटल कॉमर्स और सर्विस सेक्टर की बढ़ती भूमिका शामिल है। बड़े मेथड में बदलावों के कारण डेटा में बदलाव की दिशा का अंदाजा लगाना फिलहाल मुश्किल है, लेकिन यह सुधार देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति को सही ढंग से पेश करेगा।
महंगाई और आर्थिक आउटलुक
इसके अलावा, CPI बेस ईयर को 2024 तक अपडेट किया गया है, जिससे मौजूदा कंजम्पशन पैटर्न के आधार पर महंगाई का सही अंदाज लगाया जा सके। RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि CPI बेस ईयर अपडेट के बाद महंगाई टारगेटिंग रेंज में बदलाव पर विचार किया जा रहा है और अगली मॉनेटरी पॉलिसी में इसे शामिल किया जाएगा। रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि मजबूत घरेलू डिमांड, कंजम्पशन ट्रेंड और चल रही इकॉनमिक एक्टिविटी भारत की ग्रोथ आउटलुक को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगी, भले ही ग्लोबल चुनौतियां बनी हुई हों।