टेक्नॉलॉजी

ऑनलाइन जुए पर केंद्र की सख्ती, कानून तोड़ने पर होगी जेल और भरना पड़ेगा लाखों का जुर्माना

केंद्र सरकार ने ऑनलाइन बेटिंग ऐप्स और जुआ से जुड़े प्लेटफ़ॉर्म पर नकेल कसने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ऑनलाइन गेमिंग बिल को मंज़ूरी दे दी है, जिसे जल्द ही संसद में पेश किया जाएगा। इस बिल का उद्देश्य ऑनलाइन बेटिंग और जुआ से जुड़े ऐप्स को नियंत्रित करना है। इसके तहत टीवी, सोशल मीडिया और अन्य मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर इनसे जुड़े विज्ञापनों को प्रतिबंधित किया जाएगा ताकि युवा वर्ग इनकी ओर आकर्षित न हो। इतना ही नहीं, इस बिल में इन ऐप्स को बढ़ावा देने पर भारी जुर्माने और जेल की सज़ा का भी प्रावधान रखा गया है।

सरकार की सख्ती और टैक्स व्यवस्था

पिछले कुछ वर्षों से सरकार ऑनलाइन बेटिंग और जुआ ऐप्स को लेकर सख़्त रुख अपनाए हुए है। साल 2022 से अब तक 1,400 से अधिक ऐप्स और वेबसाइट्स पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इसके साथ ही सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग पर टैक्स का बोझ भी बढ़ा दिया है। 2023 में इस पर 28% जीएसटी लगाया गया था, जिसे वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ाकर 30% कर दिया गया। इतना ही नहीं, ऑफशोर यानी विदेशी गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म को भी टैक्स के दायरे में लाया गया है और एजेंसियों को इन्हें ब्लॉक करने की पूरी ताक़त दी गई है।

ऑनलाइन जुए पर केंद्र की सख्ती, कानून तोड़ने पर होगी जेल और भरना पड़ेगा लाखों का जुर्माना

कड़ी सज़ा और क़ानूनी प्रावधान

सरकार ने पिछले वर्ष भारतीय न्याय संहिता (Indian Justice Code) में संशोधन करते हुए ऑनलाइन जुआ और बेटिंग ऐप्स को अपराध की श्रेणी में डाल दिया। इसके तहत ऐसे मामलों में सात साल तक की सज़ा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। इतना ही नहीं, सरकार और एजेंसियां जब चाहें इन ऐप्स और वेबसाइट्स को तुरंत प्रतिबंधित कर सकती हैं। यह बिल संविधान की राज्य सूची में रखा गया है ताकि राज्यों को भी इस पर सख्ती करने का अधिकार मिल सके। यह कदम युवाओं को बढ़ती लत से बचाने और समाज पर इसके दुष्प्रभाव को रोकने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

बच्चों और युवाओं पर रोकथाम के उपाय

2022 से लेकर फरवरी 2025 तक सरकार 1,400 से अधिक ऐप्स और वेबसाइट्स को ब्लॉक कर चुकी है। इसके साथ ही शिक्षा मंत्रालय ने स्कूलों के लिए अभिभावकों और शिक्षकों को परामर्श जारी किया है, ताकि बच्चों में बढ़ती ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग की लत को रोका जा सके। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने भी टीवी चैनलों को निर्देश दिया है कि जब भी ऐसे ऐप्स से जुड़े विज्ञापन दिखाए जाएं तो वित्तीय जोखिम से जुड़े डिस्क्लेमर को अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाए। खासकर आईपीएल और अन्य क्रिकेट टूर्नामेंट्स के दौरान सोशल मीडिया और टीवी पर Dream11, My11Circle और DafaBet जैसे प्लेटफ़ॉर्म्स के विज्ञापनों की भरमार रहती है। अब नए कानून के बाद सरकार को इन पर कड़ा नियंत्रण मिलेगा और युवाओं को इनके दुष्प्रभावों से बचाया जा सकेगा।

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