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CCI रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: 28 स्टील कंपनियों पर कीमतें मिलकर तय करने का आरोप

कम्पीटिशन कमिशन ऑफ इंडिया (CCI) की हालिया रिपोर्ट में स्टील उद्योग से जुड़े एक बड़े विवाद का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, जेएसडब्ल्यू स्टील, सरकारी कंपनी सेल (SAIL), टाटा स्टील समेत कुल 28 स्टील कंपनियों ने आपसी मिलीभगत करके स्टील की कीमतें तय कीं। रॉयटर्स की रिपोर्ट में गोपनीय दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया गया है कि ये कंपनियां प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन करने की दोषी पाई गई हैं। इस मामले में 56 वरिष्ठ अधिकारियों पर सांठगांठ के गंभीर आरोप लगे हैं, जिनमें कंपनियों के उच्च पदस्थ अधिकारी जैसे जेएसडब्ल्यू के मैनेजिंग डायरेक्टर सज्जन जिंदल, सेल के पूर्व चेयरपर्सन, और टाटा स्टील के सीईओ टी. वी. नरेंद्रन शामिल हैं। ये कथित गड़बड़ियां 2015 से 2023 के बीच हुईं, जो स्टील उद्योग के लिए एक बड़ा झटका है।

स्टील शेयरों पर रिपोर्ट का असर

इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद स्टील कंपनियों के शेयर बाजार में दबाव देखा गया। मंगलवार को दोपहर के समय सेल (SAIL) के शेयर लगभग 3% टूटकर 146.32 रुपये पर पहुंच गए। वहीं, जेएसडब्ल्यू स्टील के शेयर 1.26% गिरकर 1,171 रुपये पर कारोबार करते रहे। टाटा स्टील पर इस गिरावट का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहा, लेकिन इसके शेयर भी 0.39% की गिरावट के साथ 184.99 रुपये पर बंद हुए। बाजार में इस रिपोर्ट की वजह से निवेशकों में चिंता देखने को मिली है, क्योंकि यदि CCI द्वारा जुर्माने और अन्य सख्त कार्रवाई की गई तो इसका असर कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन और शेयर की कीमतों पर और भी गंभीर हो सकता है।

CCI की जांच और कानूनी प्रक्रिया

यह मामला स्टील इंडस्ट्री से जुड़ा अब तक का सबसे बड़ा एंटी-ट्रस्ट जांच माना जा रहा है। इस जांच की शुरुआत 2021 में हुई थी, जब तमिलनाडु की एक स्टेट कोर्ट में कुछ बिल्डरों ने आरोप लगाया था कि नौ प्रमुख स्टील कंपनियां मिलकर जानबूझकर स्टील की आपूर्ति कम कर रही हैं ताकि कृत्रिम कमी के चलते कीमतें बढ़ाई जा सकें। इस गंभीर आरोप के बाद निगरानी एजेंसियों ने 2022 में कई स्टील कंपनियों के दफ्तरों पर छापेमारी भी की। जांच का दायरा बाद में बढ़ाकर 31 कंपनियों और उनके वरिष्ठ अधिकारियों तक फैलाया गया। अक्टूबर 2025 में CCI ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें इन सभी आरोपों और तथ्यों का विस्तृत उल्लेख था। हालांकि, नियमों के तहत अंतिम निर्णय आने तक मामले की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी।

स्टील उद्योग और कॉरपोरेट गवर्नेंस पर प्रभाव

इस जांच और रिपोर्ट को प्रतिस्पर्धा कानून के इतिहास में मील का पत्थर माना जा रहा है। यह घटना न केवल स्टील उद्योग बल्कि पूरे कॉरपोरेट सेक्टर के लिए एक चेतावनी भी है कि कंपनियों को प्रतिस्पर्धा कानून का पालन सख्ती से करना होगा। यदि CCI इस मामले में सख्त कार्रवाई करती है, तो इससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनुचित व्यापार प्रथाओं पर अंकुश लगेगा। साथ ही, इससे देश के उद्योग जगत में कॉरपोरेट गवर्नेंस के नए मानक स्थापित हो सकते हैं। आने वाले समय में इस मामले की कानूनी प्रक्रिया और CCI के निर्णय पर पूरी नजर बनी रहेगी, क्योंकि इसका प्रभाव भारतीय स्टील सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मकता और निवेशकों के विश्वास पर भी पड़ेगा।

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