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भारत में पहुंचे कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, राजनयिक संबंधों को नई दिशा देने का संकेत

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और उनका प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंच गया है। कार्नी मुंबई के ताज महल पैलेस पहुंचे और उनका स्वागत भारतीय अधिकारियों ने किया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर आयोजित किया गया है और इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच राजनयिक और आर्थिक संबंधों को पुनर्जीवित करना है। 27 फरवरी से 2 मार्च तक चलने वाली यह यात्रा कनाडा और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का संकेत देती है।

आर्थिक सहयोग और वित्तीय बैठकों पर फोकस

कनाडाई प्रधानमंत्री ने भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई से अपनी यात्रा की शुरुआत की। कार्नी अपने पहले दो दिन कनाडाई और भारतीय सीईओ, वित्तीय विशेषज्ञों और पेंशन फंड प्रतिनिधियों से बैठक में व्यतीत करेंगे। इसका उद्देश्य आर्थिक तालमेल को बढ़ावा देना और निवेश के लिए मजबूत व्यावसायिक माहौल तैयार करना है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि इन बैठकों के माध्यम से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और वित्तीय रणनीतियों पर गंभीर चर्चा की जाएगी।

भारत में पहुंचे कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, राजनयिक संबंधों को नई दिशा देने का संकेत

हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता

कार्नी का मुख्य फोकस 2 मार्च को हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता पर है। यह वार्ता 2025 में कनानास्किस और जोहान्सबर्ग में हुई पिछली वार्ताओं का औपचारिक अनुवर्ती कार्य है। बैठक में ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, अनुसंधान और व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत-कनाडा रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही भारत-कनाडा सीईओ फोरम के माध्यम से सरकारी नीतियों को निजी क्षेत्र के हितों के अनुरूप बनाने पर भी चर्चा होगी।

संबंधों में सुधार और राजनयिक संकेत

बीते कुछ वर्षों में कनाडा और भारत के संबंधों में आई “तीव्र गिरावट” के बाद अब दोनों देशों के संबंध सुधार की ओर बढ़ रहे हैं। पिछली ट्रूडो सरकार द्वारा लगाए गए आरोपों और राजनयिक गतिरोध के कारण संबंधों में तनाव देखा गया था। हालांकि, वर्तमान मिशन ओटावा के रुख में बदलाव को दर्शाता है। वरिष्ठ कनाडाई अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब वे भारत को कनाडा में होने वाले किसी अपराध से जोड़कर नहीं देखते। यह दौरा दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने और नई रणनीतिक साझेदारी स्थापित करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

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