
महाराष्ट्र के नगरपालिका निगम चुनावों में भाजपा गठबंधन भारी बहुमत की ओर बढ़ रहा है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि भाजपा को ब्रिहन्मुंबई नगरपालिका निगम (बीएमसी) में बहुमत मिलने की संभावना प्रबल है। वहीं, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की पार्टियों का प्रदर्शन इन चुनावों में निराशाजनक रहा है। बीएमसी चुनावों में भाजपा अकेले सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है और उसके गठबंधन ने निर्णायक बढ़त बनाई है। दूसरी ओर, राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) भी दहाई अंकों तक सीटें नहीं पहुंच पा रही है और 22 शहरों में एक भी सीट नहीं जीत पाई है।
भाजपा गठबंधन को भारी बहुमत का फायदा
राज ठाकरे, जो मराठी जनता के हितों के लिए जाने जाते हैं, इन चुनावों में पूरी तरह से पिछड़ गए हैं। महाराष्ट्र के 29 नगरपालिका निगमों में कुल 2869 सीटों पर चुनाव हुए जिनमें से भाजपा 1064 वार्डों में आगे है जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 282 वार्डों में बढ़त बनाए हुए है। कांग्रेस 222 सीटों पर आगे है जबकि राज ठाकरे की पार्टी केवल 12 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। मुंबई में कुल 227 सीटों में से MNS केवल 5 सीटों पर ही बढ़त में है। कल्याण डोंबिवली में 122 सीटों में से MNS सिर्फ 4 सीटों पर बढ़त में है। यहां भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना की मजबूत पकड़ है। ठाणे में 131 सीटों में MNS केवल एक सीट पर बढ़त में है। नासिक में कुल 122 सीटों में से MNS केवल 2 सीटों पर बढ़त में है।
राज ठाकरे की पार्टी का 22 शहरों में शून्य प्रदर्शन
राज ठाकरे की पार्टी इन चुनावों में पुणे, संभाजी नगर, कोल्हापुर, सांगली-मिरज, मीरा-भायंदर, वसई-विरार, भिवंडी, पनवेल, नागपुर, परभणी, जलना, पिंपरी-चिंचवाड़, सोलापुर, मालेगांव, जलगांव, धुळे, इचलकरंजी, नांदेड, लातूर, अमरावती, अकोला और चंद्रपुर जैसे 22 शहरों में एक भी सीट जीतने में असफल रही है। ठाकरे बंधुओं ने लंबे समय बाद इन चुनावों के लिए एक साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया था। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने 29 शहरों में केवल कुछ प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारे थे। बीएमसी में शिव सेना (यूबीटी) और MNS ने मिलकर चुनाव लड़ा, लेकिन MNS ने केवल कुछ सीटों पर ही जोरदार प्रचार किया और मुंबई में केवल 5 सीटें जीतने का अनुमान है।
MNS के मजबूत क्षेत्र भी कमजोर पड़े
राज ठाकरे ने अपने मजबूत क्षेत्रों पुणे और नासिक पर खास ध्यान दिया था, लेकिन यहां भी पार्टी केवल 2 सीटें जीतने की स्थिति में है। शिवसेना (यूबीटी) और MNS की जोड़ी उम्मीदों के विपरीत प्रदर्शन कर रही है, जबकि भाजपा गठबंधन हर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। महाराष्ट्र की राजनीति में यह चुनावी नतीजा भाजपा के लिए एक बड़ा सफलता संदेश लेकर आया है। इससे स्पष्ट होता है कि जनता का रुझान भाजपा गठबंधन की ओर बढ़ रहा है और ठाकरे परिवार की पार्टियों को इस बार जनता से कोई खास समर्थन नहीं मिल पाया। यह चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा बदलाव लेकर आ सकता है।
