अमित शाह ने हरिद्वार में रम्पुर तिराहा कांड याद दिलाकर जनता को किया जागरूक

केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड सरकार के चार साल पूरे होने के मौके पर हरिद्वार में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें स्मृति चिन्ह और पारंपरिक टोपी देकर स्वागत किया, जो उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। अमित शाह ने अपने संबोधन में पूर्व प्रधानमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान को याद किया और बताया कि किस प्रकार उन्होंने उत्तराखंड राज्य के निर्माण में अहम भूमिका निभाई।
रम्पुर तिराहा कांड की याद दिलाई जनता को
अमित शाह ने कहा, “मैं उत्तराखंड के लोगों को याद दिलाने आया हूँ कि एक समय ऐसा भी था जब इस देवभूमि को उसके अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था। युवाओं ने अपनी संस्कृति और पहचान की रक्षा के लिए मोर्चा संभाला। उस समय कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने उत्तराखंड के युवाओं पर अवर्णनीय अत्याचार किए। कई युवाओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई और कई ने अपने प्राणों की आहुति दी। आज भी उत्तराखंड की जनता रम्पुर तिराहा कांड को नहीं भूली है।” उन्होंने कहा कि युवाओं की शहादत और संघर्ष इस धरती की पहचान है।

अटल बिहारी वाजपेयी की दूरदर्शिता को याद किया
अमित शाह ने कहा, “उस समय वरिष्ठ भाजपा नेता और प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उत्तराखंड का निर्माण किया। कांग्रेस नेता सवाल उठाते थे कि छोटे राज्य कैसे टिकेंगे और उनकी अर्थव्यवस्था कैसे चलेगी। अटल बिहारी वाजपेयी ने तीन छोटे राज्यों—उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और झारखंड—का निर्माण किया। आज ये तीनों राज्य विकास के मार्ग पर तेजी से बढ़ रहे हैं और जनता के लिए अवसर सृजित कर रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि देश के छोटे राज्यों को सशक्त बनाने में भाजपा की दूरदर्शिता और नेतृत्व की भूमिका अहम रही है।
‘वन इंडिया, बेस्ट इंडिया’ के लिए उठाए गए कदम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनता से पूछा कि क्या वे पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार चाहते हैं, जो उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास और देवभूमि की गौरवशाली पहचान लौटाएगी, या कांग्रेस पार्टी जो केवल विकास के नाम पर अपने खजाने भरती है। धामी ने कहा, “हमने ‘वन इंडिया, बेस्ट इंडिया’ का सपना साकार करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। नागरिकता संशोधन कानून ने वर्षों से उपेक्षित हिन्दू शरणार्थियों को सम्मान और सुरक्षा दी। आपकी दृढ़ता से दास मानसिकता पर आधारित ब्रिटिश अत्याचारी कानून अब समाप्त हो रहे हैं और नए कानून भारतीय मूल्यों के अनुरूप न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ कर रहे हैं।”
