टेक्नॉलॉजी

Huawei और Samsung के बाद Oppo का बड़ा दांव, ट्राई फोल्ड फोन लॉन्च पर सस्पेंस

फोल्डेबल फोन के बाद अब ट्राई फोल्ड स्मार्टफोन सेगमेंट में मुकाबला तेज हो गया है। इस सेगमेंट में सबसे पहले चीनी कंपनी Huawei ने कदम रखा। इसके बाद Samsung ने भी साल 2025 के अंत में अपना पहला ट्राई फोल्ड फोन लॉन्च कर दिया। अब इस चर्चा में Oppo का नाम भी जुड़ गया है। ओप्पो ने साफ किया है कि उसने ट्राई फोल्ड फोन के कई प्रोटोटाइप तैयार किए हैं। हालांकि कंपनी ने इन्हें अभी बाजार में लॉन्च नहीं किया है। इस खुलासे के बाद टेक इंडस्ट्री में नई बहस शुरू हो गई है कि आखिर ओप्पो इस सेगमेंट से दूरी क्यों बनाए हुए है।

ओप्पो की रणनीति क्या है

हुवावे और सैमसंग के बाद अब दूसरी कंपनियां भी इस सेगमेंट में उतरने की तैयारी कर रही हैं। Xiaomi भी ट्राई फोल्ड फोन पर काम कर रही है। वहीं ओप्पो ने बिल्कुल अलग रास्ता चुना है। कंपनी के प्रोडक्ट मैनेजमेंट से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि तकनीक के स्तर पर ओप्पो पूरी तरह तैयार है। कंपनी ने कई ट्राई फोल्ड फोन प्रोटोटाइप बनाए हैं और उनके डिजाइन और मैकेनिज्म का सफल परीक्षण भी किया गया है। इसके बावजूद ओप्पो ने इन्हें लॉन्च करने में कोई जल्दी नहीं दिखाई है। कंपनी फिलहाल बाजार की स्थिति और ग्राहकों के रुझान को ध्यान से देख रही है।

ट्राई फोल्ड फोन लॉन्च करना क्यों मुश्किल है

ट्राई फोल्ड फोन देखने में भले ही बेहद आकर्षक लगते हों लेकिन इन्हें बनाना और बेचना आसान नहीं है। ऐसे फोन की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट काफी ज्यादा होती है। महंगे हिंज और जटिल डिस्प्ले तकनीक के कारण इनकी कीमत बहुत बढ़ जाती है। ऊंची कीमत की वजह से ग्राहकों की संख्या सीमित रह जाती है। बड़ी कंपनियों के लिए भी इन फोन से मुनाफा कमाना मुश्किल हो जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक Samsung अपने ट्राई फोल्ड फोन को नुकसान में बेच रही है। कंपनी को इसकी लागत भी पूरी तरह वापस नहीं मिल पा रही है। ऐसे में ओप्पो के लिए भी इतना महंगा डिवाइस लॉन्च करना एक बड़ा जोखिम हो सकता है।

क्या भविष्य में आएगा ओप्पो का ट्राई फोल्ड फोन

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ओप्पो ने ट्राई फोल्ड फोन सेगमेंट को पूरी तरह छोड़ा नहीं है। कंपनी ने प्रोटोटाइप बनाकर यह साबित कर दिया है कि वह तकनीकी चुनौतियों को पार कर चुकी है। अब ओप्पो सही समय का इंतजार कर रही है। कंपनी चाहती है कि मैन्युफैक्चरिंग लागत कम हो और बाजार में इस तरह के फोन की मांग स्थिर हो जाए। जब ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी और कीमतें थोड़ी काबू में आएंगी तब ओप्पो इस सेगमेंट में एंट्री कर सकती है। फिलहाल ओप्पो का फोकस धैर्य और सही रणनीति पर टिका हुआ है।

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