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केलांचल के नाम से जाना जाने वाला सीमांचल अब फिर से बनेगा केला का हब।

कटिहार से रतन कुमार की रिपोर्ट

 

एक दशक पूर्व इस सीमांचल को केलांचल के नाम से जाना जाता था, लेकिन पिछले एक दशक से केले के खेती में पनामा बिल्ट नामक बीमारी की वजह से क्षेत्र में केला की खेती नष्ट हो गया, कटिहार के किसानों को भारी क्षति पहुंचा और अंततः किसान केला की खेती छोड़कर बांकी अन्य मक्का – गेहूं की खेती करने लगे, किसानों की माने तो जो मुनाफा केले की खेती में होता था बो मुनाफा बांकी किसी खेती में नहीं है,

किसानों को समस्या और केले के पौधे में लगी खतरनाक बीमारी पनामा बिल्ट से समाधान करने के लिए तामिलनाडु के NRCB नेशनल रिसर्च सेंटर बनाना– त्रिची से वैज्ञानिक शोध करने फलका किसान के खेत में पहुंचे हैं, वैज्ञानिक खुद से केले के नए पौधे को अपने अनुसंधान से दवा देकर तैयार कर रहे हैं, उधर खेतों में लगे केले का फसल खराब हो गया है, फल बेकार हो गया है, खेतों से सभी वैसे बीमारी वाले केला के पौधे को मजदूरों के द्वारा जड़ से उखाड़ा जा रहा है ताकि शोध किये गए नए पौधे को लगाकर केले का उन्नत खेती किसान फिर से कर सकें,

 वैज्ञानिक ने किसानों को भरोसा दिया है कि रोग ग्रस्त केला की खेती से अब किसानों को निजात मिलेगा,
वैज्ञानिक का खेतों तक पहुंचना और केले के नए फसल को खेत में नए तरीके से लगाने के बाद केले का अच्छा फसल होने की उम्मीद पर किसान खुश हैं, सीमांचल का यह इलाका फिर से केलांचल के नाम से जाना जाएगा और सीमांचल फिर से केला का हब बनकर किसानों को अधिक मुनाफा देगा।

 

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