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गांव में मेडिकल सुविधा नही , बीमारी से अदिमजनजाति बच्चे की मौत। परिवार में पसरा मातम ।

।।झारखण्ड।।गुमला में एक तरफ सरकार विलुप्त हो रही अदिमजनजाति को सषक्तिकरण करने और सरकार की तमाम कल्याणकारी योजना से लेकर मूल भूत सुविधा लोगो को घर तक पहुचाकर देना है। वही दूसरी ओर गांव में मेडिकल सुविधा नही मिलने से 18 महीना की बच्चे की किसी बीमारी के कारण मौत हो गयी है। सरकार जहां अदिमजनजाति समुदाय को बचाने की दिशा में प्रयत्नशील है। वही बच्चे की मौत सरकार और प्रसासन की दावे की पोल खोल रही है।

V/0-1-घटना जिले के डुमरी प्रखण्ड के करनी पंचायत मरचाई पाठ गांव की यह पूरा घटना है जहाँ किसी ना किसी की बीमारी के कारण आये दिन मौत हो जाय करती है। वही बच्चे की इलाज नही होने से बच्चे की मौत हो गयी है। वही सरकार की कल्याण कारी योजना आज भी गांव नही पहुची है। गांव में स्वस्थ की सुविधा नही है। गांव में सड़क नही होने से गांव में मेडिकल की सुविधा भी नही मिलता है। एंबुलेंस की सुविधा नही रहने के कारण ग्रामीण मरीज को खाट में या गेरुआ  पर बिठाकर अस्पताल ले जाने को मजबूर है। जिससे कई मरीज की रास्ते मे ही मौत भी हो जाती है।

बता दे कि डुमरी प्रखण्ड से लगभग 15 किमी की दूरी पर बसा मरचाई पाठ गांव है। गांव में कई समुदाय के लोग भी रहते गांव में लगभग लोगो की संख्या लगभग 400से 500 की है। वही ग्रामीणों का आना जाना भी इसी रास्ता से होता है। गांव में सरकार की कल्याण करी योजना नही है। गांव के लोगो का एक सहारा बना था आगनबाड़ी केन्द्र वह भी बिचौलिया और दलालों का निबाला बन गया है। बीमार मरीज को अस्पताल ले जाना हो तो खाट या गेरुआ में बिठाकर 4 किमी का दुर्गम रास्ता पहाड़ जंगल और नदी को पार कर जाना पड़ता है। इस दौरान हिंसक प्राणी का खतरा बना रहता है। ।। ज्ञात हो कि मरचाई पाठ गांव आजादी के 75 साल बीत जाने के बाद भी गांव के ग्रामीण आज भी सुविधाओ की बाट जो रही है। 21वी सदी की यह गांव की तस्वीर सरकार और प्रसासन की मुह चिढ़ा रही है। अब गांव के लोग पंचायत चुनाव का बहिष्कार करने की बात कही है।और किसी नेता को गांव में घुसने नही दिया जायगा।
इधर मामले को लेकर जिले के सिविल सर्जन से से जानकारी लिया तो उन्हों ने घटना से अपने आप को अनजान बताते हुए घटना की जानकारी नही होने की बात कही है। हालाकि भरोसा को दिलाया है।और कहा कि सम्बंधित अधिकारी को भेज कर दिशा निर्देश देने की बात कही है। वही मीडिया ने गांव में समस्या को लेकर समाज कल्याल पदाधिकारी से जानकारी लेने की कोशिश की तो कुछ भी बताने से इनकार किया साथ ही मीटिंग की हवाला देते हुए पल्ला झाड़ते दिखे और कुछ भी जानकारी मीडिया को नही दी गयी।
बहरहाल जो भी हो केंद्र और राज्य सरकार 21वी सदी का मॉडर्न राज्य बनने का दावा करती है। वही दूसरी और गांव के ग्रामीण आदिकाल/पुरापाषाण काल में जीने को विवस है। सरकार को चाहिए कि गांव के ग्रामीण जनता की दर्द और समस्या को दूर करने की जरूरत है। नही तो सरकार और प्रसासन को सबक सिखाने की बात कही है।

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